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"अयं निज : परोवेति गणना लघु चेतसाम् । उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम॥"
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10 जून 2010

वाक्यों में छिपे रंग पहचानिए




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1- राम बहरा है .
2- चंपक मनीला गया है.
3- कालाकांकर का राजभवन ऐतिहासिक धरोहर है.
4- अनुत्तीर्ण होने का मलाल मत करो.
5- जपी लाभ में रहा.
6- गुलगुला बीना को पसंद नहीं है.
7- पुस्तक के पहले सफे दबाकर नहीं रखना चाहिए.
8- राम ने कहा- जा मुनी के पास ज्ञान लेकर आ.
9- चोर बैग नीचे रखकर चला गया.
10- नारंगीदास बांसुरी बहुत अच्छी बजाते हैं.

संकेत :- हरा,नीला,काला,लाल,पीला,गुलाबी,सफेद,जामुनी,बैगनी,नारंगी.

08 जून 2010

"घडी"


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टिक-टिक करती घडी हमारी,
समय बताती जाती है.
रंग-बिरंगी प्यारी घडियां,
हमें खूब ही भाती हैं.

बच्चे बूढे सभी पहनते,
काम बहुत ये आती है.
लापरवाही दूर भगाकर,
समय की कद्र सिखाती है.

बिना रूके चलती है हरदम,
जीना हमें सिखाती है.
चलते जाना ही जीवन है,
घडी हमें बतलाती है.

आलस छोडो बनो घडी से,
जीवन में बढ जाओगे.
उन्नति के सबसे उंची,
चोटी पर चढ जाओंगे.

31 मई 2010

हाथी दादा


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हाथी दादा

हाथी दादा,उठा के बस्ता
पढने को स्कूल गए,
गुल्ली-डंडा,आँख-मिचौली
पतंग उडाना भूल गए.

बच्चे उनको खूब चिढाते
मोटू-मोटू कहते थे,
हाथी दादा कुछ न कहते
चुपचाप सुनते रहते थे.

हाथी दादा पढते खूब
कभी न जाते देर से,
परीक्षा में पास हुए
और नंबर लाए ढेर से.

मैडम ने की खूब बडाई
और दी उनको टाफी,
बच्चों ने अपनी गलती की
मांगी उनसे माफी.