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"अयं निज : परोवेति गणना लघु चेतसाम् । उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम॥"

10 जून 2010

वाक्यों में छिपे रंग पहचानिए




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1- राम बहरा है .
2- चंपक मनीला गया है.
3- कालाकांकर का राजभवन ऐतिहासिक धरोहर है.
4- अनुत्तीर्ण होने का मलाल मत करो.
5- जपी लाभ में रहा.
6- गुलगुला बीना को पसंद नहीं है.
7- पुस्तक के पहले सफे दबाकर नहीं रखना चाहिए.
8- राम ने कहा- जा मुनी के पास ज्ञान लेकर आ.
9- चोर बैग नीचे रखकर चला गया.
10- नारंगीदास बांसुरी बहुत अच्छी बजाते हैं.

संकेत :- हरा,नीला,काला,लाल,पीला,गुलाबी,सफेद,जामुनी,बैगनी,नारंगी.

08 जून 2010

"यूं करें अपना विरोध प्रदर्शन"


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भारत एक प्रगतिशील राष्ट्र है. राष्ट्र की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सतत् प्रयास करने के बावजूद हमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली है. अत: भारत को संपन्न एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए अदम्य आत्मविश्वास,कठोर परिश्रम, ईमानदारी एवं उपयोगी और व्यवहारिक नीतियों की आवश्यकता है.

लोकतांत्रिक राज्य में किसी नीति के प्रति सभी लोगों का सहमत न हो पाना स्वभाविक है परन्तु अपने विरोध प्रदर्शन के लिए हम हड्ताल, तालाबंदी एवं चक्काजाम आदि परंपरागत साधनों का प्रयोग करते हैं जिससे आम जनता के लिए अत्यंत असुविधाजक स्थिति उत्पन्न हो जाती है साथ ही राष्ट्र का विकास अवरूद्ध होता हैं. हमें असहमत होने एवं अपने विरोध प्रदर्शन का पूरा अधिकार है किंतु ध्यान रखना चाहिए कि हमारा विरोध प्रदर्शन भी राष्ट्र के लिए कल्याणकारी हो्. विरोध प्रदर्शन के परंपरागत साधनों के स्थान पर हम निम्न प्रकार से अपना विरोध प्रदर्शित कर सकते हैं :-

1- कार्यालयों में बिना अतिरिक्त वेतन के दो-चार घंटे अतिरिक्त कार्य करें.साथ ही अवकाश के दिन भी अवैतनिक कार्य करें.
2- सड्कों एवं गंदे स्थानों की साफ-सफाई करें.
3- असहायों एवं निर्धनों के लिए नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था करें.
4- बेसहारा-बीमार लोगों के लिए चिकित्सा एवं दवाओं की व्यवस्था करें.
5- रक्तदान करें.
6- पौधारोपण या इसी तरह का कोई अन्य जनोपयोगी कार्य करें.

उपर्युक्त बातों को व्यवहार में लाकर हम अपने विरोध प्रदर्शन को भी राष्ट्र के लिए कल्याणकारी सिद्ध कर सकते है साथ ही बिना द्वेष व तनाव उत्पन्न किए ही अपनी मांगे मनवाने में सफल हो सकते हैं.

नहले पर दहला

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पति -हर सफल पुरूष के पीछे एक स्त्री होती है.
पत्नि (चिढकर)-हां, और यह भी जान लो हर असफल स्त्री के पीछे एक पुरूष होता है.

" तो फिर बात बने'"


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आज की रात बडी देर के बाद आयी है,
रात जो देर से बीते, तो फिर बात बने....

बीत जाती है घडी मिलने की बहुत जल्दी,
वक्त रूक जाए उनके आते, तो फिर बात बने....

गिले शिकवे में बीतते हैं कीमती लम्हे,
आंखो-आंखों में जो हो बात, तो फिर बात बने....

बातें रहती हैं ढेरों उनसे करने की,
खत्म हो जाए सारी बात, तो फिर बात बने....

उनसे होती है मुलाकात इक मुद्दत के बाद,
रोज दिन हो जो मुलाकात, तो फिर बात बने....

जिंदगी के दिन कट रहे हैं उनके बिन,
रात-दिन को हो उनका साथ, तो फिर बात बने....

अक्सर वो करते हैं बातें भूल जाने की,
भुला दें भूलने की बात, तो फिर बात बने....

ईश्क के दुश्मन हों जमाने में हजार सही,
दोस्त भी हों दो-चार, तो फिर बात बने....

"घडी"


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टिक-टिक करती घडी हमारी,
समय बताती जाती है.
रंग-बिरंगी प्यारी घडियां,
हमें खूब ही भाती हैं.

बच्चे बूढे सभी पहनते,
काम बहुत ये आती है.
लापरवाही दूर भगाकर,
समय की कद्र सिखाती है.

बिना रूके चलती है हरदम,
जीना हमें सिखाती है.
चलते जाना ही जीवन है,
घडी हमें बतलाती है.

आलस छोडो बनो घडी से,
जीवन में बढ जाओगे.
उन्नति के सबसे उंची,
चोटी पर चढ जाओंगे.

31 मई 2010

हाथी दादा


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हाथी दादा

हाथी दादा,उठा के बस्ता
पढने को स्कूल गए,
गुल्ली-डंडा,आँख-मिचौली
पतंग उडाना भूल गए.

बच्चे उनको खूब चिढाते
मोटू-मोटू कहते थे,
हाथी दादा कुछ न कहते
चुपचाप सुनते रहते थे.

हाथी दादा पढते खूब
कभी न जाते देर से,
परीक्षा में पास हुए
और नंबर लाए ढेर से.

मैडम ने की खूब बडाई
और दी उनको टाफी,
बच्चों ने अपनी गलती की
मांगी उनसे माफी.

उम्मीद


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चिथडों में किसी तरह अपना तन छुपाये 11 वर्षीय राजू सेठ दीनदयाल के यहाँ जूठे बर्तन साफ कर रहा था.वह दो वर्षों से दीनदयाल जी के यहाँ काम कर रहा था.दीपावली नजदीक आ रही थी और उसके पास बेहतर कपडे नहीं थे.

सहसा उसे सेठ जी के बेटे निसर्ग की आवाज सुनायी दी,जो उसका हमउम्र था. निसर्ग धोबी को डांट रहा था जिसकी गलती से उसकी नई शर्ट की बांह जल गई थी.उसकी डांट-फटकार सुनकर राजू की आँखे खुशी से चमक उठी.उसे उम्मीद थी अब वह शर्ट उसे मिल जाएगी और उसे इन चिथडों में दीपावली नहीं मनानी पडेगी.

06 मई 2010

युवा लडकी






















युवा लड़की भी चाहती है
तितलियों की तरह उडना
कोयल की तरह कूकना
झरने की तरह बहना
पर
घर से गंतव्य तक नजरे झुकाए
रास्ते पर चलती है युवा लड़की
नेत्र रहकर भी
नेत्रहीन हो जाती है,युवा लड़की.

सूनसान रास्तों पर
अकेले नहीं जा सकती युवा लड़की
पदयुक्त होकर भी
पदहीन हो जाती है, युवा लड़की

अपनी आकांक्षाओं का दमन कर
अजनबी से तय किए रिस्ते
स्वीकार करती है युवा लड़की
मुख रहते भी
मुखहीन हो जाती है,युवा लड़की.

युवा लड़की भी चाहती है
गर्व करने युवा होने का
युवा लड़की को खेद होता है
अपने युवा होने पर
क्योंकि
कथित मर्यादाओं के
अमर्यादित आक्रमण का शिकार होती है युवा लड़की
फूल सी होकर भी समाज के लिए
भार होती है युवा लड़की
सपने देखने की उम्र में भी
यथार्थ का सामना करती है,युवा लड़की.


खण्डहर








खण्डहर पुकार रहे हैं
मैं बीता हुआ कल हूं
अतीत की लाश हूं
मुझे हटाओ
नया बनाओ

पर मुझे उनकी आवाज सूनाई नहीं देती
और आंखों के सामने खुली सच्चाई दिखाई नहीं देती
मैं खण्डहर भक्त हूं
खण्डहर के शत्रु मूझे समाज के शत्रु प्रतीत होते हैं
यद्यपि मैं अंधा हूं (और शायद बहरा भी)
पर दूसरे को अंधा कहने का मुझे हक है

मैंने सुन रखा है
कभी इस इमारत की अलग ही शान थी
इस इलाके में इसकी पृथक पहचान थी
मुझे बचपन से ही कथाओं से प्रेम है
अंतर केवल इतना है
पहले मै कथा केवल सुनता था
अब उन्हें सच भी मानता हूं

जोर की आवाज आई
खण्डहर की दीवारें भी गिर गई
अब यह मलबा सडक मे अवरोध पैदा कर रहा है
आने जाने वालों को दिक्कत हो रही है
पर मैं उन्हे नहीं हटाने दूंगा
आखिर आम नहीं खास हूं
एम ए पास हूं

खण्डहर कभी महल थे
यह बात सच है
खण्डहर अब केवल खण्डहर हैं
यह बात भी सच है

खण्डहर की वस्तुएं अजायबघर की शोभा बढाती हैं
घर की शोभा नष्ट करती हैं
हमारी जवाबदेही हैं
आगे आएं
खण्डहर हटाएं
नया बनाएं